पसंद हैं मुझे वो रास्ते.....
पता नहीं क्यों लेकिन पसंद हैं मुझे , वो सभी रास्ते जो निभाते हैं साथ मेरा , किसी भी सफलता को प्राप्त करने में | एक साधारण सी कल्पना जिसे हम बना देते हैं सफलता का एक जाना - माना प्रतीक चिन्ह उस चिन्ह और असफलता के बीच होती है, एक बारीक सी रेखा, जो दर्शाती है हमारी वास्तविक स्थिति को | जीवन की कुछ परिस्थितियों में, हो जाता है मुझे, बेहद लगाव ऐसे ही कुछ रास्तों से | ऐसा शायद इसलिए होता है क्यूंकि छूट जाते हैं , इन्ही रास्तों पर ऐसे कुछ ख़ास निशान, जो आगे चलकर याद दिलाते हैं हमें हमारी मौजूदगी की | दरअसल उन रास्तों पर जो निशान हैं, उन्हें निशान कहना ठीक नहीं , क्यूंकि ये वही खूबसूरत क्षण होते हैं जिनको हम हमेशा अपने ज़हन में जिंदा रखने की कोशिश करते रहते हैं| और शायद भूल जाते हैं हम इस बात को , कि हमने ये सफ़र शुरू क्यों किया था ? एक समय पर आकर हम खो देते हैं , उस रेखा को पार करने के डर को , और उस असफ़लता के अधूरेपन को , जो शायद कभी पूरी तरह से मिला ही ना था | इन रास्तों के अंतिम छोर पर खड़े होकर , मुस्कराते हैं हम, बिना किसी आशा या निराशा के , और बहुत पीछे छोड़ आते हैं उस कल्पना को जि...