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Showing posts from March, 2021

शहीद दिवस

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                                                                                  प्रस्तावना गाँधी जी अपनी किताब हिन्द स्वराज में कहते हैं “ मैं जितने तरीकों से वायसराय को समझा सकता था, मैंने कोशिश की | मेरे पास समझाने की जितनी शक्ति थी, इस्तेमाल की | 23 वीं तारीख़ की सुबह मैंने वायसराय को एक निजी पत्र लिखा जिसमे मैंने अपनी पूरी आत्मा उड़ेल दी | भगत सिंह अहिंसा के पुजारी नहीं थे लेकिन वे हिंसा को अपना धर्म नहीं मानते थे | इन वीरों ने मौत के डर को भी जीत लिया था, उनकी वीरता को नमन है | खून करके अगर शोहरत हासिल करने की प्रथा शुरू हो गयी तो लोग एक दुसरे का क़त्ल करके न्याय तलाशने लगेंगे “ इस कथन को पढते वक्त मैं 23 मार्च,1931 के उस दिन को, उन सभी लोगों को और उन सभी परिस्थितियों को याद कर रहा था जो उस दिन के प्रत्यक्ष गवाह रहे होंगे | कई दोस...

यात्रा संस्मरण

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प्रस्तावना काव्यनामा के इस पेज पर ऐसा शायद पहली बार हो रहा है कि मैं किसी अन्य व्यक्ति के लिखे हुए शब्दों या लेख को यहाँ प्रकाशित कर रहा हूं | लेकिन मेरा मानना है कि शब्दों में इतना सामर्थ्य होता है कि वह अपनी जगह ख़ुद ही बना लेते हैं | अब वह जगह चाहे कागज़ के पन्नों पर बनानी हो या पाठकों के मानस पटल पर | पूजा सक्सेना जी के शब्दों में मुझे वह सामर्थ्य बिल्कुल साफ़ दिख रहा था जब मैंने उनके लेख को पढ़ा | उनके इस लेख को पढ़ते समय मुझे हिंदी साहित्य में यात्रा वृतांत के युगवाहक राहुल सांकृत्यायन जी का साहित्य खूब याद आ रहा था | पूजा जी ने शब्दों का चयन बड़ी ही तन्मयता के साथ किया है जोकि इस लेख को और भी असाधारण बना रहा है |                                        - देवेश दिनवंत पाल |   ************************************************************* देशाटन शब्द से ही हमें इसके अर्थ का पता चल जाता ह...