शहीद दिवस
प्रस्तावना गाँधी जी अपनी किताब हिन्द स्वराज में कहते हैं “ मैं जितने तरीकों से वायसराय को समझा सकता था, मैंने कोशिश की | मेरे पास समझाने की जितनी शक्ति थी, इस्तेमाल की | 23 वीं तारीख़ की सुबह मैंने वायसराय को एक निजी पत्र लिखा जिसमे मैंने अपनी पूरी आत्मा उड़ेल दी | भगत सिंह अहिंसा के पुजारी नहीं थे लेकिन वे हिंसा को अपना धर्म नहीं मानते थे | इन वीरों ने मौत के डर को भी जीत लिया था, उनकी वीरता को नमन है | खून करके अगर शोहरत हासिल करने की प्रथा शुरू हो गयी तो लोग एक दुसरे का क़त्ल करके न्याय तलाशने लगेंगे “ इस कथन को पढते वक्त मैं 23 मार्च,1931 के उस दिन को, उन सभी लोगों को और उन सभी परिस्थितियों को याद कर रहा था जो उस दिन के प्रत्यक्ष गवाह रहे होंगे | कई दोस...