मेरी प्यारी बिंदु - (फ़िल्म रिव्यू आर्टिकल)
फिल्म रिव्यु आर्टिकल्स को लिखने के क्रम में यह मेरा तीसरा लेख है | इस लेख को लिखने के पीछे वैसे तो कई और भी वजह मैं बता सकता हूं लेकिन सबसे जरूरी और ख़ास बात मेरे लिए इसे लिखने की रही वो यह है कि इस फ़िल्म को मैंने पहली बार जब देखा तब इसके मायने उतने नहीं समझ पाए थे जितना आज इस वक्त लिखते हुए सोच पा रहा हूं | इस फ़िल्म को इतनी बार देख चुका हूं कि अब इसकी गिनती याद नहीं | हां लेकिन जब भी देखता हूं हर बार इसकी कहानी एक नयी बात का अहसास जरूर करा जाती है | बस उसी नयी बात को इस आर्टिकल में लिखने जा रहा हूं, जो अब तक अपने तक ही सीमित रखता था | यह कोशिश कितनी सफल होती है और कितनी असफ़ल, इसका निर्णय आप स्वयं इसे पढ़ने के बाद करियेगा | - देवेश दिनवंत पाल | 13/02/2021 (12:10 AM) “प्यार करना तो बहुत लोग सिखाते हैं, मगर अफ़सोस कि उस प्यार को भुलाते कैसे हैं ये कोई नहीं सिखाता |” इस लाइन को लिखने की सबसे सही जगह मैं शुरुआत में ही समझता हूं क्यूंकि इस आर्टिकल और इस फ़िल्म दोनों में ही कहानी की शुरुआत और उसका विराम इसी एक लाइन के साथ होता है | कहानी की ...