Film review article on मुगल ए आज़म , ( The iconic film of Indian film industry)
“तकदीरें बदल जाती हैं, ज़माना बदल जाता है, मुल्कों की तारीख़ बदल जाती है, शहंशाह बदल जाते हैं, मगर इस बदलती दुनिया में मोहब्बत जिस इंसान का दामन थाम लेती है......, वो इंसान नहीं बदलता |” यह पंक्तियाँ हिंदी/उर्दू सिनेमा की 173 मिनट समय वाली सबसे आइकोनिक और क्लासिकल फ़िल्म की है जिसने अपनी शानदार कहानी, जानदार अभिनय और कलाकारी तथा अपने उन जादुई गीतों से “मुगल ए आज़म ” नाम को भारतीय सिनेमा जगत की तकनीकी रूप से सबसे सफ़ल और उस समय की सबसे ज्यादा महंगी फिल्म साबित कर दिया था | 5 अगस्त सन् 1960 में आसिफ़ कमाल के निर्देशन में और स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन के बैनर तले यह फिल्म अपने समय की सर्वाधिक कमाई करने वाली फ़िल्म थी और इसी के साथ इस फिल्म ने फ़िल्मी जगत के कई कीर्तिमान भी स्थापित किये थे | अगर अपने निजी अनुभव की बात करूँ तो पहली बार जब इस फिल्म को देखा तो उन सभी बातों पर और भी पुख्ता भरोसा हो गया था जो इस फिल्म के बारे में सुनी थी और इस लेख में वे बातें ज़रूर साझा करूँगा | आज के समय तक इस फिल्म को कई बार देखा लेकिन हर बार इस कहानी में कुछ नया सा दिखाई दिया शायद इसलिए ही इस कहानी...